उत्तराखंड में बढ़ता मानव–वन्यजीव संघर्ष: नैनीताल में गुलदार के हमले से महिला की मौत, टिहरी में भालू ने ग्रामीण को किया घायल।

उत्तराखंड में बढ़ता मानव–वन्यजीव संघर्ष: नैनीताल में गुलदार के हमले से महिला की मौत, टिहरी में भालू ने ग्रामीण को किया घायल।

नैनीताल/टिहरी: उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। ताजा घटनाएं नैनीताल और टिहरी से सामने आई हैं, जहां एक ओर गुलदार ने एक महिला की जान ले ली, वहीं दूसरी ओर भालू के हमले में एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में दहशत और वन विभाग के प्रति आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है।

नैनीताल: घास काटने गई महिला को गुलदार ने बनाया शिकार
नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के चमोली गांव, कीटोड़ा तोक की रहने वाली रेखा देवी (पत्नी पान सिंह) अन्य महिलाओं के साथ जंगल में घास काटने गई थीं। तभी पहले से घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया।महिलाओं के शोर और चीख-पुकार के बावजूद गुलदार रेखा देवी को करीब दो किलोमीटर तक जंगल के भीतर घसीट ले गया, जहां उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। मासूम बच्चों की हालत देखकर ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां देखी जा रही थीं, लेकिन वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

लगातार हो रही मौतें, फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और वन विभाग केवल घटना के बाद औपचारिकताएं निभा रहे हैं, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस रणनीति अब तक नहीं बनी है।

पिछले दो वर्षों में ही नैनीताल जिले में बाघ और गुलदार के हमलों में 5 से अधिक महिलाओं की जान जा चुकी है, जिससे कई परिवार उजड़ गए हैं।

नैनीताल जिले में गुलदार/बाघ हमलों से मौतें
2023: भीमताल ब्लॉक के मलुवाताल (कसाइल) में इंद्रा देवी की मौत।
2023: भीमताल के अलचौना ताड़ा गांव में निकिता शर्मा की मौत।
10 दिसंबर 2023: पिनरों, डोब गांव में पुष्पा देवी की मौत।

2024: नौकुचियाताल के सिलौटी में लीला देवी की मौत।
2025: बेतालघाट के ओखलढुंगा में शांति देवी की मौत।
2025: पहाड़पानी क्षेत्र में हेमा देवी की गुलदार के हमले में मौत।

टिहरी: घनसाली में भालू का हमला, ग्रामीण गंभीर रूप से घायल
दूसरी ओर, टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र में भी वन्यजीवों का आतंक जारी है। मंगलवार सुबह भिलंगना रेंज के सरूणा गांव में भालू ने टीकाराम जोशी नामक ग्रामीण पर अचानक हमला कर दिया। टीकाराम जोशी सुबह करीब 8 बजे अपने पशुओं के लिए चारा लेने जंगल जा रहे थे, तभी झाड़ियों में छिपे भालू ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं। हालांकि साहस दिखाते हुए उन्होंने किसी तरह भालू से संघर्ष कर अपनी जान बचाई।

वन विभाग ने किया उपचार, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। उप प्रभागीय वनाधिकारी जन्मजय रमोला ने बताया कि घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के लिए पीएचसी पिलखी ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर और सामान्य है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगल की ओर अकेले न जाने, समूह में जाने और सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि हाल ही में देवप्रयाग में भालू हमले के एक अन्य मामले में पीड़ित को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।

ग्रामीणों की मांग: स्थायी समाधान जरूरी
लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पहाड़ी इलाकों में मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए कोई ठोस नीति है?
ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग केवल चेतावनी और मुआवजे तक सीमित न रहे, बल्कि पिंजरे लगाने, गश्त बढ़ाने, ट्रैकिंग और प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी निगरानी जैसे ठोस कदम तुरंत उठाए जाएं, ताकि भविष्य में और मासूम जिंदगियां न जाएं।

uttarakhandlive24
Author: uttarakhandlive24

Harrish H Mehraa

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