आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष पर बेंगलुरु में उत्तराखंड राज्यपाल गुरमीत सिंह की गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से ऐतिहासिक भेंट, वैश्विक शांति और राष्ट्र निर्माण पर हुआ विशेष संवाद।
बेंगलुरु, 28 अप्रैल 2026। आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष के ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में वैश्विक आध्यात्मिक गुरु एवं मानवतावादी नेता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से विशेष मुलाकात की। यह भेंट सेवा, आध्यात्मिकता, राष्ट्र निर्माण और वैश्विक शांति के साझा संकल्प का प्रतीक बनी।

राज्यपाल गुरमीत सिंह का आश्रम परिसर में आत्मीय स्वागत किया गया। उन्होंने गुरुदेव के साथ प्रतिष्ठित एम्फीथिएटर में आयोजित विशेष सत्संग में सहभागिता की तथा विशाल हरित परिसर और अत्याधुनिक गौशाला का भ्रमण किया। यह गौशाला देशी नस्लों के संरक्षण और सतत जीवनशैली के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जाती है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत और कंप्यूटर विज्ञान के बीच गहरा संबंध है तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य में “परम बुद्धिमत्ता” और “ब्रह्मांडीय बुद्धिमत्ता” की दिशा में विकसित हो सकती है। उन्होंने विश्व शांति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मानवता को अधिक शांतिपूर्ण, जागरूक और करुणामय दिशा में बढ़ना होगा। अपने संबोधन का समापन उन्होंने शांति मंत्र के साथ किया।
वर्ष 1981 में स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग आज विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में शामिल है। ध्यान, योग, प्राणायाम, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, आपदा राहत और मानवीय सेवा के माध्यम से संस्था 182 देशों में 80 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बना चुकी है।
45वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में इंटरनेशनल सेंटर में विश्वस्तरीय ध्यान मंदिर के उद्घाटन की तैयारियाँ जोरों पर हैं, जिसे विश्व के सबसे बड़े ध्यान स्थलों में शामिल करने की दिशा में विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र लाखों साधकों के लिए शांति, उपचार और आंतरिक संतुलन का वैश्विक केंद्र बनेगा।
उत्तराखंड में सेवा और जनकल्याण में मजबूत भूमिका
आर्ट ऑफ लिविंग ने उत्तराखंड में भी आपदा राहत और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
2013 की भीषण आपदा के दौरान संस्था के स्वयंसेवकों ने राहत शिविर, सामग्री वितरण और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं 2025 की उत्तरकाशी-धराली फ्लैश फ्लड्स के दौरान दुर्गम क्षेत्रों तक राशन, चिकित्सा सामग्री, सोलर लालटेन और राहत सामग्री पहुँचाकर सैकड़ों परिवारों को सहायता दी।
संस्था ने प्राकृतिक खेती, वृक्षारोपण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में स्थायी विकास को भी नई दिशा दी है। रुद्रप्रयाग सहित कई क्षेत्रों में महिला किसानों ने रसायनमुक्त खेती अपनाकर आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण हासिल किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर 45 वर्षों की बड़ी उपलब्धियाँ
देशभर में आर्ट ऑफ लिविंग 1,327 निःशुल्क विद्यालय संचालित कर रहा है, जहाँ 1.2 लाख से अधिक वंचित बच्चों को शिक्षा मिल रही है। संस्था के नदी पुनर्जीवन अभियानों से 75 नदियाँ और सहायक धाराएँ पुनर्जीवित हुई हैं, जबकि प्राकृतिक खेती कार्यक्रमों से 30 लाख किसानों को लाभ पहुँचा है।
राज्यपाल गुरमीत सिंह की इस विशेष उपस्थिति ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्थायी सामाजिक परिवर्तन का आधार व्यक्ति की आंतरिक शांति, सेवा और सामूहिक चेतना में निहित है। आर्ट ऑफ लिविंग का 45वाँ स्थापना वर्ष इसी वैश्विक दृष्टि को और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
Author: uttarakhandlive24
Harrish H Mehraa





