सीमाओं से परे साहित्य की गूंज: खटीमा में सजा रचनात्मक महाकुंभ, नवम सीमांत उत्सव में विचार-विमर्श, पुस्तक विमोचन और नेपाल के साहित्यकारों की दमदार भागीदारी

खटीमा में नवम सीमांत साहित्य उत्सव का रंगारंग आयोजन, नेपाल के साहित्यकारों का भी प्रतिभाग, विभिन्न सत्रों में समसामयिक विषयों पर परिचर्चा, पुस्तक प्रदर्शनी, नई पुस्तकों का विमोचन
खटीमा। मॉडर्न यूटोपियन सोसाइटी, खटीमा के तत्वावधान में नवम सीमांत साहित्य उत्सव 2026 का आयोजन 22 मार्च को हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय महाविद्यालय, खटीमा के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में स्कूली एवं महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं सहित लगभग 200 साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मॉडर्न यूटोपियन सोसाइटी तथा आमंत्रित अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। संस्था के सचिव पूरन बिष्ट ने मॉडर्न यूटोपिन सोसाइटी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, अध्यक्ष डॉक्टर सी एस जोशी ने सबका आभार जताया।
इस अवसर पर राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, खटीमा के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
प्रथम सत्र का विषय “बच्चों में स्वलीनता (ऑटिज्म)” रहा। इसमें मुख्य वक्ता खटीमा शहर की वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर अनीता चौधरी , बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रचित सक्सेना रहे उन्होंने बच्चों में स्वलीनता जैसी बीमारी के लिए इंटरनेट के अत्यधिक प्रयोग को बड़ा कारण बताया। ऐसे बच्चों के प्रति शिक्षक अभिभावक और समाज को संवेदनशील रहना चाहिए।उन्होंने विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। वार्ताकार के रूप में डॉ. कमल कमलेश अटवाल और मनीषा पंत ने उनसे संवाद किया।

दूसरे सत्र में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत कर्नल (सेवानिवृत्त) बी. एस. रौतेला से मनमोहन जोशी एवं रविंद्र पांडे ‘पपीहा’ ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से उनके जीवन एवं कार्य अनुभवों पर चर्चा की। विशेष रूप से विधवा एवं निराश्रित महिलाओं के लिए पेंशन व्यवस्था को लेकर किए गए उनके उल्लेखनीय योगदान पर प्रकाश डाला गया।
“एक लेखक का परिचय” सत्र में डॉ. महेंद्र प्रताप पांडे ने प्रसिद्ध साहित्यकार शैलेश मटियानी के जीवन और साहित्यिक योगदान पर वक्तव्य दिया। नई पुस्तक “समय से संलाप” लेखक डॉ. जगदीश पंत से हरीश शर्मा ने संवाद किया।
कार्यक्रम में पड़ोसी देश नेपाल से आए साहित्यकारों के लिए एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें
पड़ोस में हाल में हुए जेन जी आंदोलन का साहित्य समाज पर असर को समझने का प्रयास किया गया, मुख्यवक्ता महाकाली साहित्य संगम से जुड़े वरिष्ठ साहित्यिकार श्री हरिप्रसाद जोशी ने नेपाल में हाल के घटनाक्रम के बाद राजनीतिक परिवर्तनों से जुड़े कई प्रश्नों पर चर्चा की। युवा शिक्षक चेतन भट्ट ने इस सत्र का सफल संचालन किया।
समसामयिक द्वितीय सत्र में “एआई युग में साहित्य सृजन” विषय पर डॉ. सिद्धेश्वर सिंह, डॉ. दिवा भट्ट और वरुण अग्रवाल ने साहित्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जुड़ी संभावनाओं और चिंताओं पर विचार साझा किए।
तृतीय सत्र का विषय “लोक साहित्य और परंपराओं का संरक्षण” रहा, जिसमें डॉ. बृजमोहन जोशी, डॉ. अनिल कार्की, हेमा हरबोला और डॉ. मधु शर्मा ने लोक संस्कृति, समाज और परंपराओं के संरक्षण से जुड़े विविध पहलुओं पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर निर्मल न्योलिया और प्रमोद कांडपाल के मार्गदर्शन में “किताबों की दुनिया” पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में सीमांत क्षेत्र के लेखकों की पुस्तकों के साथ शिक्षा से संबंधित साहित्य को भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें शैक्षणिक पत्रिका “शैक्षिक दखल” भी शामिल रही।

कार्यक्रम का समापन राज एवं फाग के साथ हुआ। इस दौरान रतनपुर थारू हंस सांस्कृतिक जनकल्याण सेवा समिति तथा घुघुती जागर समूह हल्द्वानी द्वारा लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम में शरद कुमार सक्सेना, भुवन जोशी, ताजवर खत्री, मोहन बिष्ट, नवीन पोखरिया, जी.डी. जोशी, डॉ. लता जोशी, कैलाश पांडे, रमेश सिंह रावत, भूतपूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष गंभीर सिंह धामी, पूर्व अध्यक्ष कुंवर सिंह खनका, डॉ. हेमलता पाठक, ललित मोहन जोशी, पंकज भट्ट, श्यामवीर, नरेंद्र रौतेला, शैल सिंह, हेमा जोशी, त्रिलोचन जोशी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Author: uttarakhandlive24
Harrish H Mehraa





