रूढ़ियों को तोड़ समाजसेवा की मिसाल बनीं लोहाघाट की ” रीता गहतोड़ी, राज्यपाल ने किया सम्मानित।

रूढ़ियों को तोड़ समाजसेवा की मिसाल बनीं लोहाघाट की ” रीता गहतोड़ी, राज्यपाल ने किया सम्मानित।

देहरादून। समाजसेवा और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ मजबूत आवाज बनकर उभरीं चम्पावत जनपद के लोहाघाट की निवासी रीता गहतोड़ी को 21 मार्च को आयोजित एक गरिमामयी सम्मान समारोह में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें समाजसेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय और प्रेरणादायी योगदान के लिए प्रदान किया गया।

रीता गहतोड़ी लंबे समय से समाजहित के कार्यों में सक्रिय हैं। वर्ष 2012-13 में भी उन्हें उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रतिष्ठित तिलू रौतेली सम्मान से नवाजा जा चुका है। उनके कार्य न सिर्फ सेवा तक सीमित हैं, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने का साहस भी दिखाते हैं।
पिता और राज्य आंदोलनकारी हीराबल्लभ गहतोड़ी के निधन (2012) के बाद रीता ने परंपराओं को तोड़ते हुए न सिर्फ उनकी अर्थी को कंधा दिया, बल्कि हर वर्ष उनका श्राद्ध भी स्वयं करती हैं।

यही नहीं, उन्होंने अपनी मां हरीप्रिया को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया और नवंबर 2024 में उनके निधन के बाद डॉक्टरों की टीम को घर बुलाकर नेत्रदान का संकल्प भी पूरा कराया, ताकि किसी जरूरतमंद को रोशनी मिल सके। इस दौरान उन्होंने मां की अर्थी को कंधा देने के साथ चिता को मुखाग्नि भी दी—जो समाज में एक सशक्त संदेश है।

रीता खुद भी नेत्रदान का संकल्प ले चुकी हैं और खादी को बढ़ावा देने के लिए आजीवन खादी पहनने का प्रण निभा रही हैं। वे ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर के रूप में बाल्मीकि बस्तियों में जाकर बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करती हैं और उन्हें पढ़ाती भी हैं।
इसके साथ ही वे अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मदद, क्षेत्र की कमजोर महिलाओं की आवाज उठाने, कोविड-19 के दौरान जनजागरूकता फैलाने और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने जैसे कार्यों में निरंतर सक्रिय रही हैं।

रीता गहतोड़ी की यह यात्रा न केवल समाजसेवा की मिसाल है, बल्कि बदलते समाज में महिला सशक्तिकरण और मानवीय मूल्यों की एक मजबूत पहचान भी है।

uttarakhandlive24
Author: uttarakhandlive24

Harrish H Mehraa

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