नैनीताल में शिक्षक भर्ती में बड़ा घपला, यूपी निवास पर प्रशिक्षण, उत्तराखंड निवास पर पाई नौकरी : धारी और ओखलकांडा ब्लाक में तैनात 28 शिक्षकों पर बर्खास्तगी की तलवार, जारी किया नोटिस।
नैनीताल।।उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। नैनीताल जिले के धारी और ओखलकांडा ब्लॉक में तैनात 28 शिक्षकों पर दो राज्यों—उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—के स्थायी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। मामले की जांच शुरू करते हुए जिला शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
जिला प्राथमिक शिक्षाधिकारी एच.बी. चंद ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। शिकायत के अनुसार, संबंधित शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—दोनों राज्यों के निवास प्रमाण पत्रों का उपयोग कर डीएलएड और बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया और इसके आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्ति पाई।
बीईओ ने जारी किए नोटिस
प्रकरण सामने आने के बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के माध्यम से सभी 28 शिक्षकों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष मांगा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला या आरोप सही पाए गए, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नियुक्ति निरस्त किए जाने की संभावना भी शामिल है।
जिन 28 शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें 25 शिक्षक ओखलकांडा और 3 शिक्षक धारी ब्लॉक में तैनात हैं। ये नियुक्तियाँ अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच की गई थीं।
दो राज्यों का स्थायी निवासी कैसे?
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश से डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थी का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। प्रवेश के समय सक्षम अधिकारी द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होता है।
वहीं, उत्तराखंड में सहायक अध्यापक प्राथमिक पद पर नियुक्ति के लिए उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
नोटिस के अनुसार, इन शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश के स्थायी निवास के आधार पर प्रशिक्षण प्राप्त किया, जबकि उत्तराखंड के स्थायी निवास के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। ऐसे में सवाल उठता है कि एक व्यक्ति एक ही समय में दो राज्यों का स्थायी निवासी कैसे हो सकता है?
IPC 420 तक पहुंच सकता है मामला
जिला शिक्षा अधिकारी ने इसे तथ्य छुपाकर प्रशिक्षण या नियुक्ति प्राप्त करने का मामला बताया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि एक राज्य का स्थायी निवास सही है तो दूसरे राज्य का प्रमाण पत्र अवैध होगा। यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है।
15 दिन का अल्टीमेटम
DEO ने सभी 28 शिक्षकों को 15 दिन के भीतर स्वयं उपस्थित होकर तथ्यों सहित अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 (संशोधित 2010) के तहत सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और मामला अब जिले का सबसे बड़ा शिक्षा विवाद बनता नजर आ रहा है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया और सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और शिक्षकों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
Author: uttarakhandlive24
Harrish H Mehraa





