उत्तराखंड में नए साल से पहले अचानक बदला मौसम, पर्वतीय क्षेत्रों’ ने ओढ़ी बर्फ की सफेद चादर, बर्फबारी और बारिश से मैदानी इलाकों में ठंड ,बड़ी तादाद में उमड़े सैलानी – 

उत्तराखंड में नए साल से पहले अचानक बदला मौसम, पर्वतीय क्षेत्रों’ ने ओढ़ी बर्फ की सफेद चादर, बर्फबारी और बारिश से मैदानी इलाकों में ठंड ,बड़ी तादाद में उमड़े सैलानी –

 

उत्तराखंड में हर्षिल घाटी से लेकर औली-चमोली तक जबरदस्त बर्फबारी…, गंगोत्री हाईवे बाधित

उत्तराखंड में बर्फबारी ने चारों ओर सफेद चादर बिछा दी है। हर्षिल घाटी से लेकर औली-चमोली तक भारी बर्फबारी हुई है। बर्फबारी से गंगोत्री हाईवे बाधित हो गया है। पर्यटक बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं। निचले इलाकों में हलकी वर्षा हुई। जबकि ऊपरी इलाकों में जमकर बर्फबारी हुई।

उत्तरकाशी के गंगोत्री-यमुनोत्री धाम सहित हर्षिल घाटी और खरसाली क्षेत्र में बर्फबारी हुई। जनपद के सांकरी, राडी टॉप, चौरंगीखाल क्षेत्र में भी बर्फबारी हुई है। बर्फबारी होने गंगोत्री हाईवे गंगोत्री धाम से 35 किलोमीटर पहले सुक्की से लेकर गंगोत्री के बीच बाधित हुआ। बीआरओ की टीम गंगोत्री हाईवे को सुचारू करने में जुटी हुई है।

जबकि ऊपरी इलाकों में जमकर बर्फबारी हुई। जिले गंगोत्री, यमुनोत्री, हर्षिल, राड़ी टॉप, धराली, मुखबा, जानकी चट्टी, खरसाली, नारायण पुरी, ओसला, गंगाड़, लिवाड़ी, फिताड़ी, हरकीदून, संकारी, केदारकांठा आदि स्थानों बर्फबारी हुई।

बर्फबारी होने से गंगोत्री हाईवे शाम को ही अवरुद्ध हो गया था। हाईवे अवरुद्ध होने के कारण हर्षिल जा रहे अपर सचिव सी रविशंकर को सुक्की टॉप से वापस लौटना पड़ा। बर्फबारी में फिसलन का खतरा देखते हुए देर रात को पुलिस और स्थानीय लोगों ने हर्षिल की ओर जा रहे पर्यटकों के वाहनों को भटवाड़ी उत्तरकाशी की ओर लौटाया। सुक्की से वापस लौटते समय कई वाहन बर्फ में फिसलते और रेंगते हुए लौटे।

बीआरओ की अलग-अलग टीम ने सुक्की, हर्षिल, झाला और भैरव घाटी से गंगोत्री हाईवे को सुचारू करने में जुटी। जिस क्षेत्र में बर्फ को हटाया गया वहां हाईवे पर बर्फ की परत होने से फिसलने का खतरा बना हुआ है।बर्फबारी से स्थानीय ग्रामीण भी खुश हैं। फसलों के लिए इस वर्षा और बर्फबारी को सही मान रहे हैं।

ऊंचाई वाले गांवों में चौलाई, आलू, राजमा और सेब की पैदावार खूब होती है। फसल चक्र को नियमित करने के लिए अनुकूल तापमान की भी आवश्यकता होती है।

पर्यटकों ने लिया आनंद
उत्तरकाशी : बर्फबारी ने जनपद की वादियों की खूबसूरती बढ़ा दी है। बर्फबारी के बीच पर्यटक केदारकांठा पहुंचे हैं। पर्यटकों के लिए यह काफी रोमांचित करने वाला नजारा रहा है। सांकरी हिमालयन हॉकर्स ट्रैकिंग संस्था के चैन सिंह रावत ने बताया कि इसी सीजन में यह पहली अच्छी बर्फबारी है। इससे पहले 11 दिसंबर को बर्फबारी हुई है लेकिन वह बर्फबारी काफी कम थी। केदारकांठा जाने वाले हर एक पर्यटक को बर्फबारी का इंतजार भी रहता है। बर्फ की चादर से पहाड़ी ढलान और अधिक खूबसूरत दिखते हैं।

 

गिरते तापमान ने हिमपात की आस जगा दी हैं और मौसम विभाग ने भी 25 सौ मीटर से ऊंचाई वाली चोटियों में हिमपात का पूर्वानुमान जारी किया है। जिसके चलते नगर की ऊंची चोटियों में हिमपात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। स्नोव्यू, टिफिन टॉप, व चायनापीक की चोटी में मौसम का दूसरा हिमपात हो सकता है।

 

धारचूला के दारमा और व्यास घाटी के उच्च हिमालयी गांवों में सोमवार देर रात सीजन की दूसरी बर्फबारी हुई। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश की फुहारे भी गिरी। जिसके कारण ठंड बढ़ चुकी है, साथ ही लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भूपेश दताल और गुंजी सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने बताया कि गांव में लगभग तीन इंच और पहाड़ों में एक फुट से अधिक बर्फबारी हुई है। बर्फबारी के कारण सड़क निर्माण कार्य बाधित हुआ है। उन्होंने बताया कि सड़क में बर्फ होने से आवाजाही में दिक्कतें हो रही है।

ग्रामीण बर्फ को पिघलाकर पानी पीने को मजबूर है। उन्होंने बताया कि थर्टी फर्स्ट पार्टी के लिए दिल्ली, कोलकाता और लोकल से 20 लोगों की बुकिंग आ चुकी है। मंगलवार को 20 से अधिक पर्यटकों ने बर्फबारी का आनंद लिया। सड़क खुली होने पर ग्राम दांतू और दुगतू में भी लगभग 45 से अधिक पंचाचुली पर्यटक के आने की संभावना है।

रुद्रप्रयाग: अंग्रेजों के बसाए ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ चोपता में बर्फबारी होने के बाद सैलानियों की भीड़ उमड़ने लगी है. यहां क्रिसमस और नया साल का जश्न मनाने को लेकर देश के विभिन्न राज्यों से पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. चोपता में सैलानियों की भीड़ उमड़ने से स्थानीय व्यापारियों के भी चेहरे खिले हुए हैं.

मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से विख्यात चोपता-दुगलबिट्टा को अंग्रेजों की देन माना जाता है. साल 1925 में अंग्रेजों ने यहां पर डाक बंगला बना दिया था, जो आज भी मौजूद है. ब्रिटिश शासकों ने भारत की गर्मी से बचने के लिए ऊंचाई पर इस पहाड़ी जगह को चिन्हित किया था. हर साल क्रिसमस और नया साल मनाने को लेकर बड़ी तादाद में सैलानी चोपता पहुंचते हैं.

इस बार क्रिसमस से ठीक पहले मिनी मिनी स्विट्जरलैंड में बर्फबारी होने से सैलानियों के चेहरों पर मुस्कान देखने को मिल रही है. जबकि स्थानीय व्यापारियों को भी रोजगार मिल रहा है. बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से पर्यटक यहां पहुंचकर बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं. चोपता-दुगलबिट्टा के बुग्यालों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है. चोपता की सड़कों में पर्यटकों के वाहनों का जमावड़ा लगा है. जबकि बर्फ में वाहन फिसल भी रहे हैं. स्थानीय व्यापारी पर्यटकों के लिए अच्छी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।

पर्यटक श्रीनिका, ज्योति, रूमी दत्ता, सत्यम, विश्वजीत ने बताया कि उन्हें चोपता में आकर आनंद की अनुभूति हो रही है. कुल्लू-मनाली सहित अन्य हिल स्टेशनों में भी गए हैं. लेकिन जितनी बर्फ मिनी स्विट्जरलैंड चोपता में देखी है. इतनी बर्फ आज तक नहीं देखी. वहीं पर्यटकों की आवाजाही से चोपता-दुगलबिट्टा गुलजार बना है, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भी रोजगार मिल रहा है और उनमें खुशी देखी जा रही है.

uttarakhandlive24
Author: uttarakhandlive24

Harrish H Mehraa

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