उलधन ग्रामसभा उपचुनाव में बड़ा विवाद: प्रस्तावक के पीछे हटने के बावजूद पर्चा वैध, दूसरी उम्मीदवार का नामांकन संदिग्ध तारीख़ में निरस्त; समर्थकों में उबाल।

उलधन ग्रामसभा उपचुनाव में बड़ा विवाद: प्रस्तावक के पीछे हटने के बावजूद पर्चा वैध, दूसरी उम्मीदवार का नामांकन संदिग्ध तारीख़ में निरस्त; समर्थकों में उबाल।

खटीमा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बीच उलदन ग्रामसभा (ब्लॉक खटीमा) में पंचायत सदस्य उपचुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। दो उम्मीदवार—बादाम सिंह और मीनाक्षी राणा—के नामांकन के दौरान हुई घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।

—प्रस्तावक ने शपथ पत्र देकर नाम वापस लिया, फिर भी पर्चा बहाल

मंगलवार को नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद ही बड़ा मोड़ तब आया जब बादाम सिंह के प्रस्तावक ने तहसील में एक शपथ पत्र देकर यह स्पष्ट किया कि वह उनका प्रस्तावक नहीं बनना चाहता।
सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में नामांकन स्वतः रद्द माना जाता है, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने इसके विपरीत बादाम सिंह का नामांकन बहाल कर दिया, जिससे ग्रामीणों और विपक्षी समूहों में हैरानी फैल गई है।

—दूसरी ओर, मीनाक्षी राणा का नामांकन संदिग्ध परिस्थितियों में निरस्त

दूसरी उम्मीदवार मीनाक्षी राणा, जो भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता और पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रह चुकी हैं, का नामांकन अचानक निरस्त कर दिया गया।
और विवाद यहीं नहीं रुका—
नामांकन वापसी व निरस्तीकरण से संबंधित दस्तावेज़ पर एक दिन बाद की तारीख 16/11/2025 दर्ज की गई, जबकि ग्रामीणों के अनुसार प्रक्रिया 15 नवंबर को ही पूरी कर दी गई थी।

रसीद में ऊपर–नीचे दो अलग-अलग तिथियाँ दर्ज होने से संदेह और गहरा गया है। दस्तावेज़ पर RO के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।


एआरओ की सफाई—“निर्णय RO का, तारीख भूलवश लिखी गई”

जब इस विसंगति पर एआरओ संदीप कुमार एडीओ कृषि विभाग से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा—“यह निर्णय पूरी तरह आरओ का है। आयोग द्वारा नामांकन वापसी की तिथि 16 नवंबर तय है, लेकिन दस्तावेज़ पर तारीख भूलवश पहले ही लिख दी गई।”
हालाँकि स्थानीय लोग इस तर्क को “असंगत” बताते हुए इसे प्रशासनिक ढिलाई से बड़ा मामला मान रहे हैं।

—समर्थकों का आरोप—“दबाव बनाकर नामांकन हटवाया गया”
मीनाक्षी राणा के समर्थकों का आरोप है कि उन पर और उनके पक्षकारों पर मानसिक दबाव बनाकर नामांकन वापसी को मजबूर किया गया।
उनका कहना है कि “यह कोई साधारण प्रक्रिया नहीं थी बल्कि एक संगठित दबाव तंत्र के तहत किया गया कदम था।”

गांव में चर्चा है कि प्रशासनिक स्तर पर किसी एक पक्ष को फ़ायदा पहुंचाने के लिए नामांकन प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया गया।

—ग्रामीणों में रोष, पारदर्शी जांच की मांग

मामला सामने आने के बाद ग्रामीण आक्रोशित हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर इस तरह के निर्णय गहरी चोट करते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

—अब सबकी निगाहें निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन पर

विवाद बढ़ने के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले की जांच के आदेश दिए जाते हैं और नामांकन प्रक्रिया में सामने आई कथित अनियमितताओं पर क्या कार्रवाई होती है।

uttarakhandlive24
Author: uttarakhandlive24

Harrish H Mehraa

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