Chamoli Tunnel Accident: निर्माणाधीन विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना हादसे के बाद टीएचडीसी सख्त, लापरवाही पर लोको वैगन चालक बर्खास्त, जांच तेज।
चमोली।टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए लोको वैगन हादसे को गंभीरता से लेते हुए प्रबंधन ने सख्त कदम उठाए हैं। टनल के भीतर दो लोको वैगन की टक्कर के मामले में एक लोको वैगन चालक को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि सुपरवाइजर की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
शिफ्ट बदलते समय हुआ हादसा
मंगलवार रात करीब 8:30 बजे, टीबीएम टनल में श्रमिकों की शिफ्ट चेंज के दौरान यह हादसा हुआ। एक लोको वैगन टनल के बाहर से रात्रि शिफ्ट के 81 मजदूरों को लेकर कार्यस्थल की ओर जा रही थी। इसी दौरान वह टनल में पहले से खड़ी एक अन्य लोको वैगन से टकरा गई, जिससे कई मजदूर घायल हो गए।घटना के तुरंत बाद टीएचडीसी ने वैकल्पिक लोको मंगाई और सभी घायलों को बाहर निकालकर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर भेजा गया।
76 मजदूरों को मिली छुट्टी, 5 का उपचार जारी
टीएचडीसी के कार्यपालक निदेशक कुमार शरद ने गुरुवार को मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि घायलों में से 76 मजदूरों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि पांच मजदूरों का उपचार जारी है। उनकी स्थिति भी सामान्य बताई जा रही है और जल्द छुट्टी मिलने की संभावना है।उन्होंने स्पष्ट किया कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च टीएचडीसी वहन करेगा।
ब्रेक फेल होने से टक्कर की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टनल में खड़ी लोको वैगन का ब्रेक फेल हो गया था, जिससे वह अपनी जगह से खिसक गई और मजदूरों को लेकर आ रही लोको वैगन उससे टकरा गई। जांच में यह भी सामने आया है कि खड़ी लोको वैगन का चालक मौके पर मौजूद नहीं था, जिसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उसे बर्खास्त कर दिया गया है।
जांच जारी, सुरक्षा मानकों की होगी दोबारा समीक्षा
हालांकि घटना के तीन दिन बाद भी प्राथमिक जांच पूरी नहीं हो पाई है।
टीएचडीसी अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है।साथ ही टनल के भीतर सुरक्षा मानकों, परिचालन व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की दोबारा समीक्षा की जा रही है। खामियां पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
परियोजना की गति पर नहीं पड़ेगा असर
टीएचडीसी की 444 मेगावाट विष्णुगाड–पीपलकोटी परियोजना को वर्ष 2011 में मंजूरी मिली थी और 2014 से निर्माण कार्य चल रहा है। परियोजना चार यूनिटों में पूरी की जानी है, जिसमें पहली यूनिट को मार्च 2027 तक चालू करने का लक्ष्य है।
कुमार शरद ने स्पष्ट किया कि हादसे के बावजूद परियोजना की निर्माण गति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और अब तक 70 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण किया जा चुका है।
Author: uttarakhandlive24
Harrish H Mehraa





