BIG Breking हल्द्वानी –बनभूलपुरा अतिक्रमण मामला: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कब्जा हटेगा; प्रभावितों के लिए लगेगा विशेष कैंप।
नई दिल्ली/हल्द्वानी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में मंगलवार, 24 फरवरी को हुई सुनवाई में Supreme Court of India ने स्पष्ट कर दिया कि सरकारी जमीन से कब्जा हटाया जाएगा। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यह पब्लिक प्रॉपर्टी है और याचिकाकर्ता उसी स्थान पर पुनर्वास की मांग अधिकार के रूप में नहीं कर सकते; दी जाने वाली कोई भी राहत “रियायती” होगी, अधिकार नहीं।
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई। पीठ दिसंबर 2022 में Uttarakhand High Court के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर कथित कब्जे को हटाने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2023 में उस आदेश पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट की बड़ी बातें
“यह निजी नहीं, सार्वजनिक जमीन है” — कोर्ट ने कहा कि कब्जे की गैर-कानूनी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वहीं पर पुनर्वास की मांग नहीं — रेलवे विस्तार परियोजना के मद्देनज़र प्रभावित लोग उसी जमीन पर बसाए जाने की मांग नहीं कर सकते।
विशेषज्ञ तय करेंगे परियोजना का स्वरूप — रेलवे लाइन/विस्तार कहां होगा, यह निर्णय इंजीनियर व विषय-विशेषज्ञ करेंगे; निवासी यह तय नहीं कर सकते।
बेहतर बुनियादी सुविधाओं पर जोर — कोर्ट ने कहा कि मौजूदा इलाके में सीवेज, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं; बेहतर आवास व सुविधाएं देना प्राथमिकता होनी चाहिए।
पुनर्वास के लिए विशेष कैंप
पीठ ने Uttarakhand State Legal Services Authority को निर्देश दिया कि वह साइट पर विशेष कैंप लगाए, ताकि प्रभावित परिवार Pradhan Mantri Awas Yojana के तहत आवेदन कर सकें।
कैंप 19 मार्च के बाद लगाया जाएगा।
31 मार्च 2026 से पहले आवेदन जमा कराने पर जोर।
नैनीताल के कलेक्टर पात्रता तय कर स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को देंगे।
जिला लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के न्यायिक अधिकारी कैंप में मौजूद रहेंगे; प्रशासन लॉजिस्टिक सहयोग देगा।
आंकड़े और दलीलें
सरकार की ओर से बताया गया कि करीब 5236 परिवार और लगभग 27,000 लोग रेलवे भूमि पर रह रहे हैं। कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र नहीं हो पाएंगे। इस पर कोर्ट ने दोहराया कि राहत “विशेष सुविधा” है, स्वामित्व अधिकार नहीं।
आगे क्या?
कोर्ट ने संकेत दिया कि हजारों परिवारों के भविष्य को देखते हुए सरकार और रेलवे का लचीला व मानवीय दृष्टिकोण समाधान की दिशा में अहम होगा। साथ ही स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परियोजनाएं रोकी नहीं जा सकतीं; लेकिन पात्र परिवारों का पुनर्वास नीति के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से साफ है—बनभूलपुरा में सरकारी जमीन से कब्जा हटेगा, पर पात्र प्रभावितों के लिए पुनर्वास प्रक्रिया को व्यवस्थित और मानवीय ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
Author: uttarakhandlive24
Harrish H Mehraa





