उत्तराखंड:लिन इन में रह रहे थे प्रेमी जोड़े, प्रसव के बाद अविवाहित मां की हुई मौत, कथित पिता ने नवजात को अपनाने से किया इन्कार, अब किसके साए में पलगा मासूम?

उत्तराखंड:लिन इन में रह रहे थे प्रेमी जोड़े, प्रसव के बाद अविवाहित मां की हुई मौत, कथित पिता ने नवजात को अपनाने से किया इन्कार, अब किसके साए में पलगा मासूम?

देहरादून उत्तराखंड से एक बेहद मार्मिक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां प्रसव के बाद एक अविवाहित युवती की मृत्यु हो गई, जबकि नवजात शिशु का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, एक अविवाहित युवती ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मां की मौत के बाद नवजात पूरी तरह असहाय हो गया।
बताया जा रहा है कि नवजात के कथित पिता ने पहले बच्चे को अपने साथ घर ले जाने की सहमति जताई थी, लेकिन बाद में उसने जिम्मेदारी लेने से साफ इन्कार कर दिया। इस फैसले के बाद युवती और युवक दोनों के परिवारों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस मासूम की परवरिश कौन करेगा?

बाल कल्याण समिति को दी गई सूचना
अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले की लिखित सूचना बाल कल्याण समिति (CWC) को भेज दी है। डॉक्टरों का कहना है कि नवजात को निक्कू (NICU) वार्ड में सीमित समय तक ही रखा जा सकता है। इसलिए अस्पताल ने समिति से अनुरोध किया है कि शिशु को अस्थायी रूप से शिशुगृह (शेल्टर होम) में स्थानांतरित किया जाए।

बाल कल्याण समिति की सदस्य नीता कंडपाल ने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन को निर्देशित किया गया है कि नवजात का आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद समिति ‘शिशु के सर्वोत्तम हित’ को ध्यान में रखते हुए आगे की कानूनी और संरक्षात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
अब आगे क्या?
कानूनी प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में बाल कल्याण समिति को बच्चे की अभिरक्षा, संरक्षण और भविष्य की व्यवस्था तय करने का अधिकार होता है। यदि परिजन जिम्मेदारी लेने से इन्कार करते हैं, तो शिशु को शिशुगृह या अधिकृत दत्तक ग्रहण संस्था के संरक्षण में रखा जा सकता है।
फिलहाल, मां की ममता से वंचित यह नवजात अस्पताल के संरक्षण में है और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए उसके सुरक्षित भविष्य की राह तलाश की जा रही है।
यह घटना न केवल सामाजिक संवेदनशीलता का सवाल उठाती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि ऐसे नाजुक मामलों में मानवीय जिम्मेदारी और कानूनी व्यवस्था कितनी अहम हो जाती है।

uttarakhandlive24
Author: uttarakhandlive24

Harrish H Mehraa

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