नए साल पर केक नहीं करुणा— DM सविन बंसल की पहल ने जीता देहरादून का दिल, बदली चार बेटियों की ज़िंदगी, गरीबी से हारते सपनों को मिली उड़ान।

नए साल पर केक नहीं करुणा— DM सविन बंसल की पहल ने जीता देहरादून का दिल, बदली चार बेटियों की ज़िंदगी, गरीबी से हारते सपनों को मिली उड़ान।

देहरादून | 01 जनवरी 2026 साल 2026 की पहली सुबह देहरादून के लिए सिर्फ कैलेंडर बदलने का दिन नहीं थी, बल्कि यह उम्मीद, संवेदना और जिम्मेदारी का संदेश लेकर आई। जब शहर जश्न में डूबा था, तब देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने नए साल की शुरुआत किसी केक काटने या औपचारिक कार्यक्रम से नहीं, बल्कि जरूरतमंद बेटियों की शिक्षा को संजीवनी देकर की।

‘नंदा–सुनंदा’ बना नए साल की पूजा
कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम सविन बंसल ने प्रोजेक्ट ‘नंदा–सुनंदा’ के तहत चार निर्धन परिवारों की बेटियों को 1.55 लाख रुपये की शिक्षा सहायता के चेक सौंपे। यह राशि उन छात्राओं के लिए जीवनदान साबित हुई, जिनकी पढ़ाई गरीबी, बीमारी और पारिवारिक त्रासदी के कारण बीच रास्ते में रुकने वाली थी।

डीएम ने कहा—
“नए साल की सबसे बड़ी पूजा तब होती है, जब किसी बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो जाए।”
जब आपबीती ने सभागार को किया नम
कार्यक्रम के दौरान भावनाएं उस वक्त छलक पड़ीं, जब दून विश्वविद्यालय की छात्रा जीविका अंथवाल ने अपनी कहानी साझा की। उनके पिता लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार हैं और आईसीयू में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। परिवार की पूरी जमा-पूंजी इलाज में खत्म हो चुकी थी, जिससे जीविका की उच्च शिक्षा खतरे में पड़ गई थी। प्रशासन की मदद ने उन्हें फिर से सपने देखने का हौसला दिया।

हादसे ने छीना पिता, प्रशासन बना सहारा
नंदनी राजपूत की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं। वर्ष 2018 में एक हादसे ने उनके सिर से पिता का साया छीन लिया। मां सिलाई-बुनाई कर घर चला रही हैं, लेकिन 11वीं कक्षा की फीस भरना संभव नहीं था। प्रशासन की सहायता ने नंदनी को दोबारा स्कूल की दहलीज तक पहुंचा दिया।
जब बेटियां बनीं दिव्यांग माता-पिता की उम्मीद
गरीबी और बीमारी का सबसे कठिन चेहरा दिव्या, आकांशी धीमान और नव्या नैनवाल के परिवारों ने देखा।
दिव्या के पिता दुर्घटना के बाद दिव्यांग हो गए और लंबे समय तक बिस्तर पर रहे।

नव्या के पिता के निधन के बाद पढ़ाई बोझ बन गई थी।
इन सभी बेटियों की शिक्षा अब प्रशासन के सहयोग से बिना किसी रुकावट जारी रहेगी।
93 बेटियों के सपनों को मिला नया आसमान
प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा का यह 11वां संस्करण था। अब तक जिला प्रशासन इस पहल के तहत 93 मेधावी बालिकाओं की शिक्षा को फिर से पटरी पर ला चुका है, जिन पर कुल 33.50 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
‘पैसे की कमी प्रतिभा का रास्ता नहीं रोकेगी’

डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि योजनाएं फाइलों में नहीं, ज़मीनी स्तर पर दिखें। पैसे की कमी किसी भी मेधावी छात्रा के सपनों के बीच नहीं आने दी जाएगी।”
उन्होंने छात्राओं को लक्ष्य तय कर पूरे मनोयोग से पढ़ाई करने का संदेश दिया। जिन्होंने इस पहल को प्रशासन की मानवीय सोच का प्रतीक बताया।

लाभान्वित बालिकाओं ने अपनी जीवन परिस्थितियों को साझा करते हुए जिला प्रशासन का आभार जताया। नंदनी राजपूत ने पिता की दुर्घटना में मृत्यु के बाद आर्थिक तंगी के चलते बाधित हुई अपनी 11वीं कक्षा की पढ़ाई पुनर्जीवित होने की जानकारी दी। दिव्या, आकांशी धीमान व नव्या नैनवाल ने भी प्रशासनिक सहयोग से शिक्षा पुनः प्रारंभ होने पर खुशी जाहिर की। दून विश्वविद्यालय की छात्रा जीविका अंथवाल ने गंभीर रूप से बीमार पिता के कारण आई आर्थिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए सहायता के लिए प्रशासन को धन्यवाद दिया।

कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती आदि मौजूद रहे।

uttarakhandlive24
Author: uttarakhandlive24

Harrish H Mehraa

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